॥ शिव चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
नमामि शंकरं भक्त्या, विश्वनाथं सुखप्रदम्।
जटाधरं गंगाधरं, प्रणतार्तिहरं हरम्॥
॥ चौपाई ॥
नमो त्रिलोकनाथाय, नमस्ते भूतभावन।
नीलकण्ठ महादेव, शरणं मम शंकर॥ (१)
वृषभारूढ़ गौरीश, चन्द्रमौलि विभूषण।
सर्पहार सुशोभित, त्रिपुरारी नमो नमः॥ (२)
कैलाशवासी शंभो, भोलेनाथ करुणाकर।
अघोर घंटाध्वनि प्रिय, दीनानाथ नमोस्तुते॥ (३)
भस्माङ्ग रुद्राक्षधारी, दिगम्बर महेश्वर।
पिनाकपाणे पाहि मां, नमामि त्वां शिवेश्वर॥ (४)
ताण्डव नृत्य प्रिय शिव, प्रलयस्थिति कारण।
अनादि अनन्त अविनाशी, नमामि तव चरण॥ (५)
॥ दोहा ॥
जो ध्यावे शिव चालीसा, हरि हर बिमुख संकट।
सुख सम्पत्ति बढ़े नित्य, शिव प्रसाद अमित॥
॥ श्रद्धांजलि ॥
हे भोलेनाथ! तुम्हारी ज्योति अनन्त है,
तुम्हारे ताण्डव में सृष्टि का ताल है।
भक्त की पुकार सुनो, प्रेम से स्वीकार करो,
मेरे मन के अंधकार को ज्ञान से हरो॥
Shiva Beej Mantra
ॐ नमः शिवाय॥
(Om Namah Shivaya)
