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स्त्रष्टा-श्रीजना
स्त्रष्टा-श्रीजना
कविता- म त्यस वेला पनि~दैवज्ञराज न्यौपाने
महाकविको कविता- शून्यमा शून्य सरी
कविता- कविता सारी भए पो हुन्थ्यो~क्षेत्रप्रताप अधिकारी
कविता- चिया पिउँदैगर्दा~अज्ञेय
कविता- काठमाण्डू एक्लैले अब काठमाण्डू बोक्न सक्दैन ~कृष्णभूषण बल
कविता- यो जिन्दगी खै के जिन्दगी !हरिभक्त कटुवाल
महाकविको कविता- पागल
ईश्वरवल्लभको कविता- एउटा तीब्र बिहान
विजय मल्लको कथा- कालो चस्मा