राहु चालीसा 

दोहा:
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

चौपाई:

जयति जयति राहु देवता, करहु सदा भक्तन हित।
त्राहि-त्राहि कृपा करहु, दीनन के हित चित॥काल स्वरूप महाभीम, नाम सुनत ही कंप कलेवर।
दुष्ट ग्रह जब छाय करहिं, तब होत दुःख भरी॥राहु ग्रह जपत ही नर, तारहु संकट भारी।
भक्तन की पीर मिटावहु, देत सुख अपार॥जो कोई पढ़ै राहु चालीसा, होत सुख संपत्ति निश्चय।
दूर होत सब संकट, मिटत अरिष्ट अशुभ॥

दोहा (अंतिम):
राहु चालीसा पाठ करै, जो नर धरै ध्यान।
ताके सकल मनोरथ, करै पूर्ण भगवान॥

(राहु बीज मंत्र)

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥
(Om Bhraam Bhreem Bhraum Sah Rahave Namah)