दोहा 
वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥


॥गणेश चालीसा॥

गणनायक करुणाकर, मंगलकारी प्रभाव॥

वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ॥

निर्मूलित विकार सभी, सर्वदोष हरणकर्ता॥

मोदकस्वाद प्रियभोजी, भक्तजन उद्धारक॥

बुद्धिदाता दीर्घजीवी, सुखसागरसंकरी॥

कपिनन्दन दयालु, ज्ञानदीप धर्मदीपक॥

सुमति-सिद्धि-दाता गण, वन्द्य हृदय में घर करा॥

चतुर्भुज विभूषित, करध्वज मूषकपर वाहन॥

वरदस्वरूप शुभकारी, कटकशूल कटहर॥

एकदन्त प्रतिमानायक, द्विदन्त वक्रदंता॥

गजानन कलानिधि, करुणामयी महा गुरु॥

भक्तजन सहाय कर, सब संकट निवारक॥

प्रथम पूज्य गणनायक, सर्वदेव प्रियतम॥

महाकवच महाशक्तिमान, आत्माराधना प्रवर्तक॥

राम रूप सत्यस्वरूप, धर्ममार्ग प्रदीपक॥

लक्ष्मीपतिसहायकर, शरणागतनिवासक॥

विद्या-विनय-साहित्य, भक्तिधाम अचल॥

बुद्धि मति देय काज, अतल करुणधारा॥

संकट हरन मंगलकारी, वक्रदंता गुणकर॥

सारथी जगतरक्षक, भक्तन मनोहर॥

ॐ गं गणपतये नमः, यशोवृद्धि दायक॥

शिरोमुख करुणामयी, चरणकमल दर्शिका॥

मुकुटमणि शोभनाकार, तेजस्वी विभूषित॥

भक्तमनी लहुरहान, शोकहर हृदय शान्त॥

भवचक्रविधारिण, मोक्षद्वारप्रदीपक॥

सुमिरन मात्र प्रभावी, विघ्नहर सक्रीय॥

नवग्रह संकट दूर, मंगलमोहर रूप॥

देवाधिदेव सदा पूज्य, नमोऽस्तु प्रभो जगद् गुरु॥

ब्रह्मा विष्णु शंकर वंद्य, गणनाथ करुणाकर॥

द्वारपाल करुणामय, भक्तन हृदय निवास॥

स्मरण मात्र विनायक, दुःखविनाशक॥

मधुर वाणी पूजनीय, शशिपट शशिप्रभ॥

सुखसमृद्धिदायक, धन्य देवनारायण॥

शतशः पाठ फलित, भक्तजन मनोहर॥

जय श्री विनायक देव, सर्वदा करुणाकर॥

भक्तन सेवासुखद, प्रणम्य चरण कमल॥

गणना-गणपतिप्रिय, वंदन करूं निरंतर॥

सिद्धि-बिद्धि परिणामकारी, धन्य भगवन् दाता॥

विघ्नबाधा कटितकारी, मंगलमूर्ति विधाता॥

सदा रहे कृपा तुम्हारी, रघुपति दास सदा॥


दोहा (समाप्ति)
वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥

Ganesha Beej Mantra

ॐ गं गणपतये नमः॥
(Om Gam Ganapataye Namah)