॥ दुर्गा चालीसा॥

॥ दोहा ॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो अम्बे दुख हरनी।
निराकार है ज्योति तुम्हारी, तिहूं लोक फैली उजियारी॥

॥ चौपाई ॥

शरण गहूं मैया की, भक्ति करूं छल-रहित।
मोको मतवाली करो, जगदम्बे दया निधि॥ (१)

शुंभ-निशुंभ विदारनी, महिषासुर घातिनी।
धूम्र विलोचन नैना, चण्ड-मुण्ड संहारिनी॥ (२)

सिंहवाहिनी भवानी, शत्रु संकट निवारिणी।
कर में खड्ग-खप्पर, दुष्टों का लहू पिणी॥ (३)

जय जय जगदम्बे माता, चराचर की जननी।
ब्रह्माण्ड-पालन हारिनी, तुम ही हो भव-भय-हरणी॥ (४)

माता रूप धर धरती को, सुख-समृद्धि दिया।
कष्ट हरो मेरे माता, भक्ति मेरी स्वीकार कीजै॥ (५)

॥ दोहा ॥

जो भक्त तुम्हें ध्यावे, दुर्गा चालीसा पाठ।
कभी न डरें संकट से, माता करें साथ॥

॥ श्रद्धांजलि ॥

हे जगदम्बे! तुम्हारा तेज अपरम्पार है,
तुम्हारी माया में सृष्टि का आधार है।
भक्त की पुकार सुनो, शीघ्र फल दो माता,
मेरे मन की कामना पूरी करो दुर्गा मैया॥

Durga Beej Mantra

ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
(Om Dum Durgayai Namah)