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कविता-काव्य

बृद्धाश्रममा बस्छन्, आमा-बुबा ! घरमा चै कुकुर पालिन्छ !!

त्यो समी रुखको याद आउँछ

फेसबुके खेती

कताकता आजभोलि दशैं नजिक आएजस्तो लाग्छ ।

बाँझो छाडेर जमिन चामल किनेर खान्छन

शिरिष्को फूल

पाल्पासा क्याफे

कर्णाली ब्लुज

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